mann

kisi abhedya rahasya ki tarah parat dar parat khulta hua mann achank hi phir adrashya ho jata hai.......

सोमवार, 25 अप्रैल 2011

कविता : मन

       मन

उड़ता कभी पंख लगा कर
कभी  बैठ जाता सिमट कर
और जानिएं »
प्रस्तुतकर्ता poonam chandralekha पर 5:04 am 3 टिप्‍पणियां:
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मेरे बारे में

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poonam chandralekha
"हर दिन कुछ नया सीखते रहने का नाम है जिंदगी" - इसी मूलमंत्र को जीवन का अहम् हिस्सा मान कर चलने वाली, नजाकत नफ़ासत और शराफत के लिए दुनिया भर में मशहूर नवाबों की नगरी लखनऊ की रहने मैं पूनम अपने ब्लॉग पर आपका अभिनन्दन करती हूँ. लखनऊ विश्वविद्यालय से आधुनिक इतिहास तथा गढ़वाल विश्वविध्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर उपाधि ,यहीं से हिंदी में पी.एच.डी.उपाधि प्राप्त. श्रेष्ठ साहित्य पढने में शुरु से ही रूचि किन्तु लेखन कार्य काफी बाद में शुरू हुआ . कविताएँ, कहानियाँ तथा विभिन्न विषयक आलेख पत्र -पत्रिकाओं में प्रकाशित . बाल गीत रचना पर "मधुबन प्रकाशन"की ओर से तथा एपिक लिट्रेसी पुरस्कार . काव्य संग्रह"सन्नाटा बुनता है कौन" २०१५ में प्रकाशित. पत्र -पत्रिकाओं में कविताएँ,आलेख,आलोचना आदि प्रकाशित. मैं कभी हारती नहीं. या तो जीतती हूँ या सीखती हूँ. अशक्त होती हूँ कई बार, टूटता मनोबल बार-बार. खोता विश्वास अनेक बार. पर...हार न मानने की जिद, टूट कर भी न बिखरने की शपथ लिये बैठती हूँ हर रोज़ प्रकृति के आँगन में मैं अपने पास... अपने साथ... बस इतना सा है मेरा परिचय.
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